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बाण चलाकर अर्जुन ने कुरुक्षेत्र में प्रकट की थी गंगा, जानें वजह 

कुरुक्षेत्र में महाभारत की लड़ाई लड़ी गई थी और जिससे जुड़े कई तीर्थ स्थल मौजूद हैं.

इन तीर्थ स्थलों में से ही एक है नरकातारी तीर्थ जिसका महाभारत के युद्ध में काफी महत्व है.

इसका संबंध महाभारत के सबसे बलशाली और विद्वान पात्र भीष्म पितामह से है.

यहां गंगाजी, बाण शय्या पर लेटे भीष्म पितामह, पांचों पांडव और द्रौपदी की मूर्तियां स्थापित है. 

माना जाता है कि भीष्म पितामह ने बाणों की शय्या लेटे हुए इसी स्थान से युद्ध को देख था. 

यहां एक जलकुंड भी है जिसे बाण गंगा या भीष्म कुंड कहा जाता है.

मान्यता है कि जब भीष्म बाणों की शय्या पर लेटे थे, तो उन्हें प्यास लगी और उन्होंने पानी मांगा.

तब अर्जुन ने तुरंत जमीन में एक तीर मार वहां से पानी की जलधारा निकाल दी थी.

अर्जुन के बाणों से प्रकट हुई जलधारा से भीष्म पितामह ने अपनी प्यास बुझाई.

इस घटना के यहां घटित होने के कारण इस तीर्थ का संबंध महाभारत काल से जोड़ा जाता है.

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